सामाजिक तौर पर मुसलमानों में शेख, सैयद, पठान और मुगल को सवर्ण मुस्लिमों के वर्ग में माना गया है और इन्हें General कैटेगरी में रखा जाता है, अगर आरक्षण लागू होता है तो बाकी सवर्णों की तरह शेख, सैयद, पठान और मुगल को भी आरक्षण का लाभ मिल सकता है।
लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमज़ोर स्वर्ण जातियों को आरक्षण देने की घोषणा करी है,जिसके बाद देशभर में एक नई बहस ने जन्म ले लिया है,सरकार के अनुसार ऊंची जाति के आर्थिक रूप से कमजोर 10 प्रतिशत लोगों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।
ऐसा नहीं है कि इसका लाभ सिर्फ हिंदू सवर्ण समाज को ही मिलेगा. मुसलमानों में भी कुछ सवर्ण जातियां सामाजिक तौर पर घोषित हैं. उन्हें भी इस 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा. आइए जानते हैं मुसलमानों में कौन-कौन सी जातियां सवर्ण वर्ग में आती हैं।
राजनीतिक अनुमानकर्ताओं का कहना है कि ‘वैसे तो मुसलमानों में मज़हबी और सामाजिक तौर पर जाति व्यवस्था और ऊंच-नीच का कोई चलन नहीं है. दूसरे ये कि अगर कोई कहता है कि मैं सैय्यद हूं, मैं पठान और मुगल, शेख हूं तो वो साबित कैसे करेगा.
वहीं मिर्जा गालिब रिसर्च एकेडमी के निदेशक डॉ. इख्तियार जाफरी बताते हैं, ‘जो सैय्यद होने का दावा करते हैं उनका कहना है कि वो हज़रत मोहम्मद साहब के वंशज हैं. जिसके चलते समाज में उन्हें ऊंचा ओहदा मिला है.
वहीं पठानों के बारे में कहा जाता है कि ये सेनाओं का संचालन करते थे. दूसरे समुदाय को सुरक्षा देते थे. हुकूमत करते थे. मुगल कोई अलग से नहीं थे. ये भी पठानों में से ही हुए हैं. जो पठान मुगल थे उनहें मुगल पठान कहा गया. ये भी हुकूमत करना, सेना की कमान संभालना और लोगों को सुरक्षा देने का काम करते थे. ये क्षत्रियों की तरह से योद्धा जाति है।

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