निकाह समारोह में तब्दील हुआ तब्लीगी जमात का जलसा।
मसूदा में रात भर रहा अफसरों का डेरा। पलाड़ा की रही भूमिका।

8 मार्च को अजमेर के मसूदा उपखंड के राबड़ा बाड़िया गांव में होने वाला तब्लीगी जमात का जलसा ऐन मौके पर निकाह समारोह में तब्दील हो गया। इससे मसूदा क्षेत्र में माहौल शांतिपूर्ण रहा। तब्लीगी जमात का तीन दिवसीय जलसा ब्यावर के निकट भीम के खेसावास गांव में 7 मार्च से शुरू होना था, लेकिन हिन्दू संगठनों और रावत सेना के पूरजोर विरोध के बाद प्रशासन ने जलसे की अनुमति नहीं दी। रावत सेना का आरोप रहा कि धर्म परिवर्तन के लिए तब्लीगी जमात का जलसा हो रहा है। खेसावास गांव में जलसे की अनुमति नहीं मिलने के बाद तब्लीगी जमात के जलालुद्दीन काठात ने मसूदा के राबड़ा बाड़िया गांव में 8 मार्च को एक दिन का जलसा करने की घोषणा की, लेकिन 7 मार्च को हिन्दू संगठन और रावत सेना फिर सक्रिय हो गए। रावत सेना के स्थापक महेन्द्र सिंह रावत और प्रदेश संयोजक गोपाल सिंह रावत ने घोषणाकी यदि मसूदा के राबड़ा बाड़िया में तब्लीगी जमात का जलसा होगा तो सेना के सैकड़ों कार्यकर्ता ब्यावर से राबड़ा बाड़िया तक वाहन रैली निकालेंगे। रावत सेना की इस घोषणा से एक बार फिर मसूदा क्षेत्र के हालात तनाव पूर्ण हो गए। मसूदा की भाजपा विधायक श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा के पति और भाजपा के वरिष्ठ नेता भंवर सिंह पलाड़ा 7 मार्च की शाम को ही मसूदा क्षेत्र में सक्रिय हो गए। उन्होंने तब्लीगी जमात के लोगों को भी समझाया की वे ऐसा कोई काम नहीं करे जिसकी वजह से मसूदा क्षेत्र के हालात बिगड़ते हों। उन्होंने कहा कि हम इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि हैं इसलिए इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी हमारी भी बनती है। पलाड़ा के प्रयासों से ही रात भर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मसूदा में डेरा डाले रहे। स्वयं पलाड़ा भी रात भर मसूदा में रहे। भारी विरोध को देखते हुए तब्लीगी जमात ने अपने जलसे को निकाह समारोह में बदल दिया। निकाह के समारोह में उन्हीं लोगों को प्रवेश दिया गया, जिनके पास वैध परिचय पत्र थे। तब्लीगी जमात का जलसा नहीं होने की वजह से रावत सेना ने भी वाहन रैली का कार्यक्रम रद्द कर दिया। फिलहाल मसूदा क्षेत्र में शांति बनी हुई है, लेकिन कहा जा रहा है कि तब्लीगी जमात के लोगों में नाराजगी है। तब्लीगी जमात के जलालुद्दीन काठात का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से जलसा करना चाहते थे, लेकिन दोनों ही स्थानों पर प्रशासन ने अनुमति नहीं दी है। उन्होंने कहा कि धर्मपरिवर्तन के आरोप बेबुनियाद हैं। वे तो सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के लिए ऐसे जलसे करते हैं। वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय विधायक पलाड़ा की भूमिका की मसूदा क्षेत्र में सराहना हो रही है। पलाड़ा ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी इस बात के निर्देश दिए कि तब्लीगी जमात के जलसे से कानून व्यवस्था बिगड़नी नहीं चाहिए। पलाड़ा ने स्पष्ट कहा कि समाज विरोधी तत्वों के विरोध सख्त कार्यवाही होनी चाहिए और यह ध्यान रखा जाए कि मसूदा क्षेत्र में बाहरी तत्व सक्रिय न हों।
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