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शनिवार, 8 अगस्त 2020

मुसलमानों बिते हुए सब हादसे भुलकर आनेवाली नसलो को (इखरा) पढाई मे आगे बढाओ यहि इस्लाम और वक्त का मुलमंत्र है !


एक मशूर और मारुफ शकसियात “कु.कार्लेटन फियोरीना ”जो के एच.पी.  की सीईओ थी, और इस खातून ने एक भाषण दि थी‌ जो एचपी की ऑल वर्ल्डवाइड कंपनी मॅनेजर्स की मीटिंग थी, उसमे ये खातून सीईओ थी उस जमाने मे ..

 ये भाषण अन्होने 26 सप्टेंबर 2001 को, .. याणी 11 सप्टेंबर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का वाकीया हुआ था जिसपर मुसलमानो पर इल्जाम पर इल्ज़ाम लगाये जा रहे थे, ..

उनकी स्पीच इंग्लिश मी थी हम उसका अनुवाद यहा बताने की कोशीश करते है, ..

 ये भाषण बोहोत हिम्मत बहोत जसारत की चीज़ है.  जहा मुसलमान आपने आप को मुसलमान कहने से शर्मा रहे थे जो वाकीया वहा  हुआ, ये खातुन जो इसाई है इसने ट्विन टॉवर के ब्लास्ट के 2 हफ्ते बाद एक तकरीर में दुनिया से ऐलान किया और कहा और उसने शुरुवात ‌कि !


 ✦ अनुवाद...

 एक जमाना था एक कौम गुजरी है जो दुनिया मैं सबसे बेहतरें कौम थी, (अभी उसने नाम नहीं लिया)

 »ये वो कौम थी जिसने एक ऐसी हुकुमत कायम की जो जो एक बरे आज़म से दुसर बरे आज़म और, एक पहाडी इलाके से दुसरे इलाके तक., जंगलात और तमाम दिगर ज़मीनात इनके पास थी.!


 »इनके हुकुमत के अन्दर हजारो और लाखो लोग रहते थे जो मुख्तलिफ मजहब के मानने वाले थे !


 »इसकी ज़ुबान दुनिया की आल्मी ज़ुबान बन गयी थी और बहोत से कौमो के बिच मे ताल्लुकात कायम करने की वजह बन गयी थी इसकी ज़ुबान !


 »इसके अंदर जो फौजे (सैन्य) थी वो मुखतलीफ मुमालीकत से थे ,.  और जो हिफाजात इन्होने दि ऐसी हिफाजात दुनिया मे इस से पहले नहीं देखने को मिली कहि !


 और तिजारत दक्षिण अमेरिका से लेकर चीन तक और तमाम बिच के इलाको तक फैली हुई थी !


 »ये जो कौम थी जिन चीज़ से चलती थी वो इनके खयालात थे, इन्केशाफात ते, इनके आविष्कार थे!.


 »इंक इंजीनियर्स ने ऐसी इमामारे बनाइ जो जमीन के कशिश (कुवावत) के खिलाफ थी. यानी बडी बड़ी इमारात तामीर कारते ते !


 »इनके मॅथेमेटिस्ट्स जो थे इन्होने बीजगणित और अल्गोरिदम जैसे विषय की बुनिआद डाली जो आगे चलकर कॉम्प्यूटर के बनाने और एन्क्रिप्शन की टेक्नॉलॉजी इजाद हो साकी.


 »इंके जो तबीब डॉक्टर ते जो इंसानी जिस्मो को जान्चते और नए-नए इलाजात निकालते उन बिमारियो और कमज़ोरिओ के.


 »इंके जो इल्म-ए-फ़लकीयत रखणे वाले लोग थे वो गौर करते जमीन और और आसमान मैं और तारो को नाम देते और यहि ज़रिया बानी आज के दिन के सैटेलाइट और दिगर स्पेस एक्सप्लोरेशन का जो आज हम इन्काशाफत कर रहे है उसकी वजह है !


 »इनके मुसन्नीफ (लेखक) थे वो किताबे लिखते ते, कहानिया लिखते ते, कहानिया जो जसारत, हिम्मत, ताखत कुवत की, मोहब्बत की.


 »इनके जो शायर थे वो मोहब्बत के बरे मेरे शायरी लिखते, ये वो ज़माना था जब दुसरे इसके कहने के लिए बोहोत जयादा खौफज़दा हुआ कारते थे !


 »जब दुसर लोग नये  इन्काशाफत के बारे मे सोचना भी उन्के लिये कौफ था ये कौम तो सोच पे जीया कारती थी.


 »जब दुनिया इस चीज़ पर आ चुक थी थी पिच्छली कौमो का इल्म मीटा दिया जाये इस कौम ने वो इल्म बाकी रखा और लोगोतक तक पहोचाया (यानी इसाईत ने जब सोच जितना ग्रीक नॉलेज था वो मिटा दिया जाए वो इल्म मुसलमानोने  बा'सलामत लोगून टाक पोहचाया)


बहोत सारी चीज़ जो आज की हम दुनिया में देख रहे है, इस्तेमाल कर रहे है, ये बोहोत सारी चीज़ उस कौम की है है जिस्के बरे मे मै बात कर रही हू, वो “इस्लामिक वर्ल्ड” है, इस्लामी कौम है, मुसलमान है  ,.  जिसने 8 वी सदि से लेकर, 16 वी सदि तक दुनिया को मशाल-ए-रह दिखाइ!


 और इसके अंदार उस्मानी खलिफा, और बगदाद,.  और शाम (सिरिया) और कहेरा, मिस्र की लायब्ररी, कुतुबखने और अआच्छे हुकुमरा जैसे के “सुलेमान द मॅग्निफिशियंट” भी मौजदू.


 आगे वो कहती है के - "बहोत सारी चीज़ जो हमको मिली है इस कौम से, हला की हम जानते है, फिर भी हम इनके अहसानंद नहीं है"

 और आगे वो कहती है के - “इनकी ये देन आज हमरी जिंदगी का हिसा है, और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज आज वजूद मे नहीं होती!  अगर मुसलमान वैज्ञानिक ना होते .. "


 क्यूंकी उसका आयटी (इन्फोर्मेशन टेक्नॉलॉजी) से तल्लुक था वो एचपी की सीईओ थी उसनी सिर्फ ये बताने के लिये के आज हम इस कंपनी के जरि जिस्का हम फयदा उठा रहे है ये किसी का अहसान है हम पर जिस कौम ने हमे दीया है, वो मुसलमान  ते.


 # तो अंदाजा लगायिये किस जसारत से उसने 2 हफ्ते बाद ट्विन टॉवर के ब्लास्ट के बाद मुसलमान का नाम लेना बूरी बात समझ जा रहा थी उसी माहौल मे अमेरिका मी इस् नॉनमुस्लिम खातून ने भाषण दी और कहा के ये कौम तो इंसानियत के फायदे के लिए आइ  है !


 सबकः

 तो लोग हमे जानते है, लोग हमे पहचानते  है, सिवाय इसके के हम सो रहे है, जबकी लोग तो हमको जगाना चाहते है .. यह बात यहि तो बात रही है के माजी (भूत) मैं हमारे आबा-ओ-आजदाज ने बहोत  सारे तजरुबात, .. बोहोत सारे इंकशाफ, बोहोत सारे कारनामे किये !  चाहे वो दीनी उलूम मे हो या दुनियावी!  दोनो मे महारत हसिल की थी !


 * आज मुसलमानो को जरूरत है के हम डट्ट जाए ईस चीज़ पर, जो तालिबे इल्म स्कूल जते है, ये इल्म भी इस नियात से हसिल करे के इसका भी अज्र और सवाब मिले, ..

 * और साथ मे वलीदेंन जहा दुनियावी इल्म सिखाते है, दीनी इल्म को भी उतनी हि बल्के उससे ज्यादा तरजी दे, ..

 के मेरी औलाद जहा जबरदस्त हाफीजे कुरान हो, वही एक जबरदस्त दुनियावी किसी फन का माहिर भी हो ..


 * आज उम्मत को ऐसे लोगो की जरूरत है जो दीन मे महारत रखते है वो दुनिया मैं भी महारात रखे ..

 * तो हम आगे अगर दुनिया में रहना है और दीन पर चलना है तब भी हमको ये दुनियावी इल्म जान'ना है .. इस्लीए के इसके बगैर जीना भी मुश्किल है हमारा ,,, सही इल्म तक पोहच नहीं पायेंगे, क्या हमारे खिलाफ है और क्या हक  मे वो समझ नहीं पायेंगे .. और फिर मोहताज हो जायंगे, कमतर हो जाएंगे, बद्दार हो जाएंगे, .. और जो हलत हो रही है बहराहाल हम सब देख रहा है .. ये इल्म को छोडने का नतीजा दिनी और दुनियावी, ..  जिसकी वजह से आज हमपर कौमे तसलुद कर रहती है, चाहे जिस भी नाम से हो, ..


 * इल्म नफा हि नफा देता है, .. इल्म का कभी कोई नुक्सन नहीं है याद राखिये, ..

 खर्च किजिये इसके ऊपर अगर पैसा लगता है .. खुश माल इसके लिये लूटाये, इस्लीके ये जयज जगाह जाह आप अपना माल लूटा सकते है ..

 जीस तरहा से हमारे आबा-ओ-आजदाद वे के दीन और दुनिया मे वो महारत रखते ते, और ऐस ऐसा कारनामे को अंजाम दिया करते ते जिसको देखकर आज दुनिया उंगिलिया दबा लेती है अपने दांतो मे .. के क्या वाकई मे मुसलमान ऐसे हैं थे? के क्या वाकये में मुसलमानो का ये इल्म था,.


 * तो लिहाजा हमारे ये अल्फाज़ हमारे लिए नमुना है, .. हमको ये दोनो इल्म को वापस उसी जगाह लाकर उस उसी तरिके से हसिल करना है,.  फिर इंशा'अल्लाह !!  वही जमाना, वो खुशीया, वो तमाम चिज़े हमारी जिंदगी मे वपिस लौट कर आयेंगे जो हमारी देन थी इंसानियत को, ..


"बहरहाल इल्म की अहिमियात को समझिये इसको जाने और और इसको खुश हसिल करे, ..

 इसई पोस्ट के साथ हम इस मुद्दे के विषय को पुरा करेंगे, ۔۔۔


✍️✍️पठाण अनवरखान , संपादक-तेज़ज़न्युज़24वेब,युट्युब चैनल..

पत्रकार तथा सामाजिक कार्यकर्ता.

बालुर ता.सेलु जि.परभणी (431503). 

मो.नं.8888375846

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