देश की खातिर जान न्योछावर कर गए 'बिरसा मुंडा'.
संपादकिय,अनवर पठान.हर दिन बहुत ही ख़ास होता है क्योंकि हर दिन का एक इतिहास होता है. कैलेंडर की हर एक तारिख अपने आप में बहुत सी ऐसी घटनाएं छिपाए हुए होती हैं, जो बहुत ही दिलचस्प और रोचक होती हैं. ऐसी ही कई घटनाएं छिपी हैं 9 जून की तारीख में भी.
इस दिन कहीं किसी को शहादत मिली, तो किसी ने की नई खोज. कहीं पर जंग की शुरुआत हुई, तो कहीं पर शुरू हुए संगीत के सुर. ऐसी ही कई जानी-अनजानी घटनाएं इस दिन से जुड़ी हैं.
तो चलिए आज जानते हैं 9 जून से जुड़ी ऐसी ही प्रसिद्ध घटनाओं के बारे में–
बिरसा मुंडा की शहादत =9 जून 1900 के दिन भारतीय आदिवासी क्रांतिकारी बिरसा मुंडा शहादत को प्राप्त हो गए. अंग्रेजों ने उन्हें रांची जेल में कैद कर रखा था. यहाँ उन्हें भीषण यातनाएं देकर मार दिया गया. बिरसा ने अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष खड़ा किया था.
असल में बिरसा ने 1890 में अग्रेजों के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत की थी. अंग्रेजों ने जल्द ही उनके पहले संघर्ष को दबा दिया था. इसके बाद बिरसा ने 1895 में अंग्रेजों के खिलाफ आर या पार की लड़ाई लड़ने के लिए अपने साथियों का आह्वान किया.
इस आह्वान के बाद बिरसा ने संगठित रूप से गुरिल्ला तकनीक से अंग्रेजी पुलिस वालों और अधिकारियों को मारना शुरू किया. बिरसा और उनके साथियों ने अंग्रेजों के करीब 100 ठिकानों को भी जला दिया.
बिरसा के इस विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेजों ने भी पूरी ताकत झोंक दी. बिरसा का यह विद्रोह अंग्रेजों के लिए कितना खतरनाक साबित हो रहा था, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों ने बिरसा की गिरफ़्तारी पर 500 रूपए का इनाम घोषित कर रखा था.
आगे अंग्रेजों ने अपनी एक विशाल टुकड़ी भेजकर आदिवासी क्षेत्रों में कत्लेआम मचा दिया. उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों को खून से भर दिया और बिरसा को पकड़ लिया. बिरसा अपनी गिरफ़्तारी के समय सोए हुए थे.
बिरसा के साथ उनके दूसरे साथियों को भी पकड़ा गया. उन्हें उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजाएं दी गई.
Tezznews24.
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