डरा हुआ ‘पत्रकार’, मरा हुआ ‘नागरिक’ बनाता है, मौजूदा सरकार यही चाहती है : रवीश कुमार
नई दिल्ली.
ट्रिब्यून की पत्रकार रचना खेहरा के ख़िलाफ़ एफआईआर किस बात की। धीरे-धीरे इसी तरह से हर पत्रकार के भीतर डर बिठा दिया जाएगा। घर से लेकर दोस्त यार कहने लगेंगे कि मत लिखो, मत बोलो, सरकार है कुछ भी कर लेगी ,.
ट्रिब्यून की पत्रकार रचना खेहरा के ख़िलाफ़ एफआईआर किस बात की। धीरे-धीरे इसी तरह से हर पत्रकार के भीतर डर बिठा दिया जाएगा। घर से लेकर दोस्त यार कहने लगेंगे कि मत लिखो, मत बोलो, सरकार है कुछ भी कर लेगी ,.
आधार को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े तक है। कई जगहों से आधार के लीक किए जाने की ख़बरें पढ़ने को मिलती रहती हैं। कुछ कमियां हैं तो सरकार उसे ठीक करे, रिपोर्ट से सहमत नहीं है तो अपनी राय दे और छापने या दिखाने के लिए कहे ,.
बात बात में एफआईआर और मुकदमे की धमकी देकर डराने से आप जनता का ही नुकसान होगा। बाकी ऐसा नहीं है कि आप समझदार नहीं है। किसी की रिपोर्ट में त्रुटी का लाभ उठाकर मुकदमे में फंसाने का तरीका पुराना है ,.
जो भी है अच्छा नहीं है। डरा हुआ पत्रकार, मरा हुआ नागरिक बनाता है। डर डर कर कुछ लिखेगा ही नहीं तो आपको सही बात पता कैसे चलेगी बेशक रिपोर्ट की आलोचना कीजिए लेकिन नौकरी से निकलवाना, इस्तीफा दिलवाना, किनारे लगवा देना, मुकदमा करना, ये सब पुराने समय के तरीके हैं और अफसोस आज भी जारी हैं ,…
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