*क्या है अहमदनगर के मशहुर वाकया सरोष टॉकीज पर हुये बॉम्ब ब्लास्ट की हकिकत ?*
*आजादी की लडाई मे अहमदनगर के भिंगार के रहनेवाले हबीब खान, रत्नम पिल्ले, पन्नालाल चौधरी, खोमणे यही चारों थे सरोष बॉम्ब हल्ले में मुख्य आरोपी ओर आझादी के असली हिरो*
*: इंजि.इम्रान हाजी अन्वर खान पत्रकार*
*: इंजि.इम्रान हाजी अन्वर खान पत्रकार*
*अहमदनगर : अाज से ७५ साल पहले २५ डिसेंबर १९४२ को अहमदनगर शहर के सरोष टॉकीज यहापर ब्रिटीश अधिकारीयों पर हुआ था आजादी का पहला बॉम्ब ब्लास्ट.*
*पुणे के ब्रिटीश सैनिकी छावनी से जिंदा बॉम्ब चुराकर एक ओरत के पेट पर बांधकर छुपाकर लाया गया अहमदनगर के भिंगार यहापर ओर यही से मानों क्राती की ज्योत सिलग गयी. इस दौरान अहमदनगर के किले मे नजर कैद थे उस वक्त के आझादी के महान नेतागण जिसमें पंडित जवाहर लाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आझाद, सरदार वलल्भ भाई पटेल जैसे बडे नेता, लिडर इस वजह से भी अहमदनगर के उस वक्त के स्वातंत्र सैनानीयों मे अलग सी उर्जा - जोष का माहौल था.*
*महत्मा गांधी जी ने अंग्रेजो चले जाओ का नारा बुलंद किया ओर देश मे मानों आझादी की लहर दौड पडी. ब्रिटीशों व्दारा सविनय की कौशीशों का विरोध करना यही उस वक्त के स्वातंत्र सैनानीओंका मुख्य काम था. ब्रिटीश कुछ करे तो ये लिडर उसका खुलकर विरोध कर रहे थे. ऐसे मे अलग विचार लेकर आर या पार की सोच लेकर नेताजी सुभाष चंद्र भोस ने अपना अलग संघटन खडा कर लिया था. इस बीच स्वातंत्र सैनानीयोंका एक गुट मारधाड पर आमदा था ओर शायद यह उस वक्त की जरूरत भी थी.*
*भिंगार मे मौजुद जिंदा बॉम्ब मिलने पर योजना बनी के सरोष टाकिज मे २५ डिसेंबर को क्रिसमस के रोज छुट्टी के मौकेपर फिल्म देखने केलिये बडे बडे ब्रिटीश अधिकारी आयेंगे, फिल्म का नाम था *चॉकलेट सोल्जर* *योजना के तहत बॉम्ब फेकने का कार्य सोपा गया भिंगार के रहनेवाले हबीब खान इनको.* *कहा जाता है की हबीब खान उस वक्त के बडे बैहतरीन गेंदबाज ओर क्रिकेट के बडे शौकीन थे हबीब खान ओर शायद अपनी तेज ओर अच्छी गेंद बाजी, गेंद फेकने की इसी खास वजह से उन्हे बॉम्ब फेकने की जिमेदारी दि गयी ओर उनके लम्बे कद का भी उपयोग होंगा यह सोचकर उन्हे वह जबाबदारी दि गयी. उनकी उंचाई करीब ७ फीट लम्बी थी. यही उनकी खास वजह बन गयी.* *जैसे ही फिल्म शुरू होकर इंटरवल तक पोहोची ओर बडे बडे ब्रिटीश अधिकारी मध्यान्न केलिये चायपानी - खाने केलिये सरोष टॉकीज के कँटिन की तरफ बडे तभी हबीब खान इनको इशारा हुआ ओर उन्होने धडाम से बॉम्ब को फेक दिया कँटिन मे मौजुद ब्रिटीश अधिकारीयों के बीच. इस हादसे मे कई ब्रिटीश अधिकारी मारे गये ओर कई घायल हुये.* *खास बात घायलों को अस्पताल लेकर जानेवालों में हबीब खान भी थे इस की एक वजह ये भी थी के हबीब खान ब्रिटीश अस्पताल मे उस वक्त नोकरी पर थे.*
*आजादी की लडाई मे अहमदनगर के भिंगार के रहनेवाले हबीब खान, रत्नम पिल्ले, पन्नालाल चौधरी, खोमणे यही चारों थे सरोष बॉम्ब हल्ले में मुख्य आरोपी ओर आझादी के असली हिरो. उस वक्त रेडियोंपर नेताजी सुभाष चंद्र भोस जी ने विशेष उल्लेख कर इन अहमदनगर के वीरों का सन्मानपुर्वक उच्चार किया ओर कहा के *शब्बास इंडिया,* *ये देश की आझादी के उस वक्त की पहली घटना थी. इसलिये इसे इतना महत्व है. इस के बाद मानों बॉम्ब ब्लास्ट की लहर छा गयी ओर पुणे, पंजाब जैसी जगहोंपर ब्रिटीशोंपर बॉम्ब ब्लास्ट शुरू हो गये. इसी के चलते इन चारोंपर मुकदमा दायर किया गया.* *उस वक्त के स्वातंत्र सैनानी आ.भाई सथ्था ने मुंबई के बडे बॅरिस्टर - बडे वकील नरिमन जी को इन चारों की केस लडने केलिये बुलाया. इन चारोंपर मुकदमा चला - पर कोई पुखता सबुत, साक्षीदार ना होने की वजह से इन्हे बरी किया गया. पर ब्रिटीश सरकार को ये पता था के इन्हे अगर छोडा तो ये बडा कुछ हंगामा करेंगे इसलिये विसापुर जेल यहॉपर इन्हे करीब ३ साल जेल में नजरबंद रखा गया. उसके बाद तो देश १९४७ को आझाद ही हुआ तब ये रिहा हुये.*
*महत्मा गांधी जी ने अंग्रेजो चले जाओ का नारा बुलंद किया ओर देश मे मानों आझादी की लहर दौड पडी. ब्रिटीशों व्दारा सविनय की कौशीशों का विरोध करना यही उस वक्त के स्वातंत्र सैनानीओंका मुख्य काम था. ब्रिटीश कुछ करे तो ये लिडर उसका खुलकर विरोध कर रहे थे. ऐसे मे अलग विचार लेकर आर या पार की सोच लेकर नेताजी सुभाष चंद्र भोस ने अपना अलग संघटन खडा कर लिया था. इस बीच स्वातंत्र सैनानीयोंका एक गुट मारधाड पर आमदा था ओर शायद यह उस वक्त की जरूरत भी थी.*
*भिंगार मे मौजुद जिंदा बॉम्ब मिलने पर योजना बनी के सरोष टाकिज मे २५ डिसेंबर को क्रिसमस के रोज छुट्टी के मौकेपर फिल्म देखने केलिये बडे बडे ब्रिटीश अधिकारी आयेंगे, फिल्म का नाम था *चॉकलेट सोल्जर* *योजना के तहत बॉम्ब फेकने का कार्य सोपा गया भिंगार के रहनेवाले हबीब खान इनको.* *कहा जाता है की हबीब खान उस वक्त के बडे बैहतरीन गेंदबाज ओर क्रिकेट के बडे शौकीन थे हबीब खान ओर शायद अपनी तेज ओर अच्छी गेंद बाजी, गेंद फेकने की इसी खास वजह से उन्हे बॉम्ब फेकने की जिमेदारी दि गयी ओर उनके लम्बे कद का भी उपयोग होंगा यह सोचकर उन्हे वह जबाबदारी दि गयी. उनकी उंचाई करीब ७ फीट लम्बी थी. यही उनकी खास वजह बन गयी.* *जैसे ही फिल्म शुरू होकर इंटरवल तक पोहोची ओर बडे बडे ब्रिटीश अधिकारी मध्यान्न केलिये चायपानी - खाने केलिये सरोष टॉकीज के कँटिन की तरफ बडे तभी हबीब खान इनको इशारा हुआ ओर उन्होने धडाम से बॉम्ब को फेक दिया कँटिन मे मौजुद ब्रिटीश अधिकारीयों के बीच. इस हादसे मे कई ब्रिटीश अधिकारी मारे गये ओर कई घायल हुये.* *खास बात घायलों को अस्पताल लेकर जानेवालों में हबीब खान भी थे इस की एक वजह ये भी थी के हबीब खान ब्रिटीश अस्पताल मे उस वक्त नोकरी पर थे.*
*आजादी की लडाई मे अहमदनगर के भिंगार के रहनेवाले हबीब खान, रत्नम पिल्ले, पन्नालाल चौधरी, खोमणे यही चारों थे सरोष बॉम्ब हल्ले में मुख्य आरोपी ओर आझादी के असली हिरो. उस वक्त रेडियोंपर नेताजी सुभाष चंद्र भोस जी ने विशेष उल्लेख कर इन अहमदनगर के वीरों का सन्मानपुर्वक उच्चार किया ओर कहा के *शब्बास इंडिया,* *ये देश की आझादी के उस वक्त की पहली घटना थी. इसलिये इसे इतना महत्व है. इस के बाद मानों बॉम्ब ब्लास्ट की लहर छा गयी ओर पुणे, पंजाब जैसी जगहोंपर ब्रिटीशोंपर बॉम्ब ब्लास्ट शुरू हो गये. इसी के चलते इन चारोंपर मुकदमा दायर किया गया.* *उस वक्त के स्वातंत्र सैनानी आ.भाई सथ्था ने मुंबई के बडे बॅरिस्टर - बडे वकील नरिमन जी को इन चारों की केस लडने केलिये बुलाया. इन चारोंपर मुकदमा चला - पर कोई पुखता सबुत, साक्षीदार ना होने की वजह से इन्हे बरी किया गया. पर ब्रिटीश सरकार को ये पता था के इन्हे अगर छोडा तो ये बडा कुछ हंगामा करेंगे इसलिये विसापुर जेल यहॉपर इन्हे करीब ३ साल जेल में नजरबंद रखा गया. उसके बाद तो देश १९४७ को आझाद ही हुआ तब ये रिहा हुये.*
*आज कहा जाता है इनके परिवार के लोगों में हबीब खान पठाण के परिवारजन पुणे मे स्थायिक हो गये. तो रत्नम पिल्ले जी के वंश से अॅड.आर.आर.पिल्ले जी आज भी भिंगार स्थित है. पन्नालाल चौधरी जी कि पिढी नागपुर चले गये तो खोमणे जी के परिवार से डॉ.खोमणे आज भी अहमदनगर शहर मे डॉक्टर है.*
*इन चारों महा मानवों को हबीब खान पठाण, रत्नम पिल्ले, पन्नालाल चौधरी, खोमणे जी कों इस सरोष बॉम्ब हल्ले की ७५ साल - अमृतमोहत्सवी वर्ष पुरे होनेपर कोटी कोटी मानवंदना करता हुं.....* *अहमदनगर के मखदुम सोसायटी, मुस्कान फौऊंडेशन, इतिहास प्रेमी मित्र मंडळ आदीं संघटना हर साल ना चुकते हुये इन की याद मनातें है ओर सही मानों में इतिहास जिंदा रखने की कौशीश करते है ये बहोत बडी बात है.*
*आपका मित्र एवंम लेखक*
* अन्वर खान पत्रकार*
* अन्वर खान पत्रकार*
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