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रविवार, 16 जनवरी 2022

" हज हाउस यूपीएससी कोचिंग इंस्टीट्यूट बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करना जरूरी"



                        

               

     ( शेख महेमुद अमिनोद्दिन )      लेखक सामाजिक कार्यकर्ते व शिक्षक है ।                                             

 दि।16/01/2022.

     मुंबई हज हाउस यह संस्था खास तौर पर हज के लिए सफर करने वाले मुसाफिरों के रहने के इंतेजाम के लिए बनायी गई थी । आज के मुकाबले पहले जाने – आने के लिए यातायात के साधन उतने नहीं थे ।  इसलिए हज को जाते वक्त मुंबई जैसे शहर मे हाजियों और उन्हें विदाई देने वालों के रहने का इंतजाम हो इसलिए हज हाउस की १८ मंजिला इमारत खडी की गई थी । किंतु वक्त के साथ महाराष्ट्र में औरंगाबाद और हमारे देश के कईं राज्यों में हज हाउस बनाए गए ; साथ ही साथ यातायात के साधनों में बढ़ोत्तरी और सुविधाएं निर्माण होने से मुंबई हज हाउस का इस्तेमाल कम होने लगा । 

          वास्तव में देखा जाए तो मुंबई हज हाउस के बिल्डिंग में हज के वक्त पर सिर्फ एक महीना ज्यादा चहल – पहल रहती हैं । साल में ११ महीने यह बिल्डिंग साधारणतः खाली ही रहती है । २००६ में मुस्लिम – अल्पसंख्यांक समाज की सामाजिक , आर्थिक , शैक्षणिक स्थिति की वास्तव जानकारी देनेवाला न्यायमूर्ति सच्चर समिति का अहवाल प्रकाशित किया गया । जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोग IAS, IPS, IFS, IRS जैसे और अन्य नौकरियां में नगण्य प्रमाण में है ऐसा बताया गया । इस कारण मुस्लिम समाज के छात्र केंद्रीय लोकसेवा आयोग के परीक्षाओं में उत्तीर्ण हो और भारतीय प्रशासकीय सेवाओं में मुस्लिम समाज की हिस्सेदारी बढ़े इस उद्देश से मुस्लिम अल्पसंख्यांक छात्रों को प्रशिक्षण देने के लिए हज हाउस मुंबई में २००९ से यूपीएससी कोचिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना की गयी ।  हज के वक्त का एक महीना छोड़ बचे हुए ११ महीनों में इस बिल्डिंग के १८ मजलों में से ३ मजलों में निवासी प्रशिक्षण की सुविधा आरंभ की गयी ।

                आरंभ में मुलभूत सुविधाएं और अन्य समस्याएं होने से केवल ५० छात्रों को निवासी प्रशिक्षण / कोचिंग देना सुरू किया गया । इसके पश्चात तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी के उदासीन वृत्ति के कारण एवं वहां के अन्य कर्मियों के विरोध के चलते केवल ५० छात्रों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया चलती रही ।  हज के वक्त का एक महीना छोड़ बाकी ११ महीने हज हाउस के कर्मी हज हाउस मुंबई को अपनी व्यक्तिगत मालमत्ता के तौर पर इस्तेमाल करने लगे थे । उनके रिश्तेदार मुंबई घूमने आते या आखाती मुल्को में जाते थे तो हज हाउस का इस्तेमाल उनके रहेने के लिए किया जाने लगा । 

                  २०१७ को मुंबई हज हाउस में नियुक्ति पर आए हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी दूरगामी सोंच और विकासप्रिय व्यक्ति थे । उन्होंने केवल ५० छात्रों के लिए जो मूलभूत सुविधाएं थी ; उसको बढ़ाकर २०० छात्रों के लिए कर दि । हज हाउस के जो मजले , कमरे खाली रहते थे ; उसका इस्तेमाल उन्होंने इन छात्रों के लिए किया । गरीब मुस्लिम – अल्पसंख्यांक छात्रों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने मेस पर अनुदान देना आरंभ किया ।  केवल ₹ २७००/ में मुंबई जैसे महेंगे शहर में छात्रों को दर्जेदार शिक्षण / प्रशिक्षण एक वर्ष में उत्तीर्ण करना कठिन है । इस कारण उन्होंने चुनिंदा – संजीदा – महेनती वरिष्ट छात्रों को हज हाउस में अभ्यास करने का अवसर दिया । इस कारण सीनियर – जूनियर छात्रों के  आपसी मेल जोल, गूट-चर्चा से हज हाउस के छात्रों के कामयाबी का आलेख चढ़ता हि गया । 

                    परंतु दुर्भाग्य से वहां के कर्मियों को इन छात्रों का हज हाउस में रहेने खटक रहा था ; क्योंकी उनके खुद की आर्थिक तरक्की और उनके रिश्तेदारों का पर्यटन बंद हो गया था , और हज हाउस का इस्तेमाल विधायक काम के लिए हो रहा था । इन कर्मियोंने नए सीईओ पर दबाव बनाकर षडयंत्र रचकर छात्रों के लिए की गयी सारी सुविधाएं बंद करा दी ।  २०२१ के पूर्व परीक्षा को केवल ८ दिन शेष रहे थे तब अचानक वहां के छात्रों का पीने का पाणी बंद कर दिया गया ।  उन्हें गंदे पाणी की सप्लाई की जाने लगी । परीणाम स्वरूप परीक्षा के समय पर ७० से अधिक छात्र बीमार हो गए । नए सीईओ ने भी उदासीनता दर्शाते हुए छात्रों के हित के विरोध में निर्णय लेना और नियोजन करना आरंभ कर दिया । इसी के परिणाम स्वरूप सभी सीनियर छात्रों को वहां से निकाल दिया गया ।

                     आज ये सभी मेहनती ; जरूरतमंद वरिष्ठ छात्र अपनी पढ़ाई – कोचिंग जारी रखने के लिए आसरा ढूंढ रहे है ।  कुछ छात्र तो हालात से मजबूर होकर यूपीएससी की तैयारी बंद करने की सोंच रहे है ।  भारत के सेवा के लिए तयार हो रहे छात्र अपने भविष्य के लिए दर –ब – दर भटक रहें है । हज हाउस यह मुस्लिम समाज का भांडवल / मिलकीयत है ! वह समाज की सेवा के लिए बनाया गया है। मुस्लिम समाज को यह निर्णय करना है की; इस इमारत का इस्तेमाल समाज के छात्रों को IAS, IPS, IRS, IFS बनाकर देश की खिदमत करने के लिए करना है या कुछ मुट्ठीभर स्वार्थी कर्मचारी और उनके अमीर रिश्तेदारों के ऐश – आराम के लिए करना है । 

                      वैसे बढ़ती हुअी खिलाफत और हज हाउस यूपीएससी कोचिंग क्लास के लिए बुलंद होती हुअी आवाज को देखते हुए फिलहाल १०० छात्रों की प्रशिक्षण के लिए सूची घोषित की गई हैं। एक और मुस्लिम समाज के नाम से हल्ला मचाया जाता है की ; इनके छात्र पढ़ – लिखकर , उच्च शिक्षा प्राप्त कर राष्ट्र के मुख्य प्रवाह में सम्मिलित नहीं होते हैं । किंतु जो छात्र अपने मेहनत के बल पर हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं; उन्हें इस तरह से कष्ट पहुंचाकर , उनकी सुविधाएं छीनकर उनको पढ़ाई से रोका जाना उचित है क्या ? जिस तरह से हमारे दलित भाईयों ने मराठवाड़ा विद्यापीठ को डॉ. बाबासाहब आंबेडकर का नाम दिया जाए ; इसलिए आंदोलन चलाया था , जिस तरह से हमारे मराठा भाइयों ने आंदोलन चलाकर उनके छात्रों को मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण के लिए सारथी संस्था का निर्माण कराकर उसको आर्थिक सहाय्यता उपलब्ध कर कर दी हैं । जैसे हमारे ओबीसी भाइयों ने उनके छात्रों को लिए महाज्योति संस्था का निर्माण करा कर लिया है । वैसे ही हमें भी मुस्लिम समाज के हज हाउस का उपयोग अपने समाज के छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए करने के लिए आंदोलन करना जरूरी है । मुस्लिम समाज के सभी छात्र, अध्यापक , प्राध्यापक , डॉक्टर , इंजीनियर , व्यापारी , पत्रकार , नेतागन आदि इस आंदोलन को तीव्रता से चलाकर हज हाउस मुंबई यूपीएससी कोचिंग क्लास के छात्रों की संख्या २०० से भी अधिक करने का प्रयास करते रहें !



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