इरान कि तुलना उ.कोरिया से करना बडि भुल=डोनाल्ड ट्रंम्प.
संवाददाता.सज्जाद नयामी.
अगर हम अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के एक महीना पहले के बयानों को देखें जिसमें उन्होंने कहा कि वह सीरिया से अपनी सेना निकालने जा रहे हैं,
अरब देशों विशेष रूप से सऊदी अरब से मांग की कि या तो वह अपनी सेना भेजें जो अमरीकी सेना का स्थान लें या फिर अमरीकी सैनिकों की तैनाती का पूरा ख़र्च उठाएं या फिर दोनों काम करें, तो हमारे लिए यह समझना आसान हो जाएगा कि ट्रम्प ने किस तरह उत्तरी कोरिया के मामले में अपना स्वर बदला और सिंगापुर में जाकर उत्तरी कोरिया के नेता किम जोंग उन से मुलाक़ात की हालांकि यही ट्रम्प हैं जिन्होंने ऊन के बारे में बड़े अपमानजनक बयान दिए और उन्हें लिटिल मिसाइल मैन और जानवर तक कहा था।
ट्रम्प ने उत्तरी कोरिया के ख़िलाफ़ ज़ोरदार धमकियां दीं और नतीजे में यह शिखर वार्ता की। इस तरह वह दक्षिणी कोरिया में तैनात अपने 30 हज़ार सैनिक वापस बुलाने की तैयारी कर रहे हैं क्योंकि यह सैनिक बंधक बन कर रह गए हैं और उनकी ज़िंदगी का दारोमदार उत्तरी कोरिया की दया और नीतियों पर है। इसके अलावा दक्षिणी कोरिया और जापान पर भी एक प्रकार से बंधक बनकर रह गए थे।
बहुत से अरब देशों के अधिकारी ईरान की तुलना उत्तरी कोरिया से कर रहे हैं। कुछ ने तो यहां तक कहा कि बहुत जल्द ट्रम्प की मुलाक़ात ईरान के राषट्रपति डाक्टर हसन रूहानी बल्कि शायद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई से होने वाली है।
इस प्रकार की बातें उचित नहीं हैं और इसके कई कारण हैं। एक तो यह कि उत्तरी कोरिया ईरान नहीं है। उत्तरी कोरिया से इस्राईल कोई ख़तरा नहीं है और न ही उत्तरी कोरिया की घटक फ़ोर्सेज़ अफ़ग़ानिस्तान से लेकर भूमध्य सागर के तट तक लेबनान, सीरिया, इराक़ और अन्य देशों में फैली हुई हैं। इन फ़ोर्सेज़ की सूची बहुत लंबी है और इन फ़ोर्सेज़ ने इस्रईल के इर्द गिर्द घेरा तंग कर दिया है।
ट्रम्प उत्तरी कोरिया की ओर भाग रहे हैं ताकि यूरोप, मैक्सिको तथा कैनेडा में उन्हें जो विफलताएं मिली हैं उनकी ओर से जनमत का ध्यान हटा सकें। यही कारण हैं कि उन्होंने उत्तरी कोरिया से जल्दबाज़ी में एक दस्तावेज़ पर दस्तख़त किए जिसमें न तो मानवाधिकारों की कोई बात है न उत्तरी कोरिया के बैलेस्टिक मिसाइलों का कोई उल्लेख है बल्कि अधिकतर बातें बहुत मोटी मोटी हैं।
हमें सिंगापुर शिखर वार्ता में प्रचारिक ड्रामे के अलावा कुछ नज़र नहीं आता। यह पूरा ड्रामा है एसे आत्म मुग्ध राट्रपति का जो बार बार नाकाम होने के बाद अब छोटी छोटी सफलताओं के लिए हाथ पैर मार रहा है ताकि उसके स्कैंडलों पर पर्दा पड़े और आने वाले दिनों में होने वाले कांग्रेस के चुनावों में पार्टी की स्थिति को बेहतर कर सके।

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