सऊदी अरब मे अभिव्यक्ती स्वातंत्र कि भाषा करने पर धरमगुरुओ और बध्दिजीवियो को हो रहि है जेल...
सऊदी अरब में हालिया कुछ महीनों के भीतर धर्मगुरुओं की धरपकड़ हुई साथ ही कुछ बुद्धिजीवी भी जेल गए। रोचक बात यह है कि धर्मगुरुओं और बुद्धिजीवियों को उनके बयानों के कारण जेल में डाला गया और यह बयान इस्राईल से सऊदी अरब के बढ़ते संबंधों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए दिए गए थे।
सऊदी अरब में अभिव्यक्ति के क़ैदी नाम से चलने वाली वेबसाइट ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें गिरफ़तार किए गए धर्मगुरुओं और बुद्धिजीवियों के वह बयान शामिल हैं जिनके चलते उन्हें जेल जाना पड़ा और यह सभी बयान इस्राईल से दोस्ती बढ़ाने के ख़िलाफ़ हैं।
वेबसाइट का कहना है कि सऊदी अरब की वर्तमान सरकार इस्राईल से सऊदी अरब के बढ़ते संबंधों के ख़िलाफ़ एक शब्द भी सुनने के लिए तैयार नहीं है।
9 सितम्बर सन 2017 से जेल में बंद धर्मगुरु सलमान अलऔदा अपने एक बयान में यहूदियों की उस आस्था का मज़ाक़ उड़ा रहे हैं जिसके अनुसार हज़ारों साल पहले यहूदियों से कुछ वादा किया गया था। अलऔदा ने मज़ाक़ उड़ाते हुए कहा कि फ़िलिस्तीन की धरती पर यहूदियों का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि यह अरबों की धरती है।
25 सितम्बर 2017 से जेल में बंद जमील फ़ारिस ने ज़ायोनी शासन से संबंध स्थापित किए जाने की निंदा की और कहा कि ज़ायोनियों के साथ सामान्य संबंध यही है कि उनसे युद्ध किया जाए। जमील फ़ारिस ने आगे कहा कि यदि आप इस समय सैनिक युद्ध नहीं कर सकते तो दूसरे माध्यमों से उनके ख़िलाफ़ लड़ते रहहिए।
9 सितम्बर 2017 से जेल में बंद औज़ अलक़रनी ने कहा कि इस समय जो कुछ हो रहा है वह धोखा देने और घुटने टेक देने वाली ताक़तों से नक़ाब हटने की घटना है।
25 सितम्बर सन 2017 से जेल में बंद अब्दुल अज़ीज़ तुरैफ़ी ने बयान दिया कि इस्राईल एक ग़ैर क़ानूनी शासन है जिसने एक इस्लामी देश पर क़ब्ज़ा कर रखा है। उन्होंने क़ब्ज़ा करने वाले इस्राईल की बैतुल मुक़द्दस को अपनी राजधानी बनाने की कोशिशों की कड़ी आलोचना की।
इस वीडियो में अब्दुल अज़ीज़ तुरैफ़ी का यह बयान भी है कि फ़िलिस्तीन को वह नहीं जीत सकता जिसने उसका सौदा कर लिया क्योंकि सौदा वही करता है जिसे अब दिलचस्पी नहीं रह गई है। तुरैफ़ी ने यह भी कहा कि विजय ख़ून से प्राप्त होती है और बिक्री पैसे के बदले होती है जिसने पैसे से कुछ बेचा है उसे वह ख़ून देकर नहीं ख़रीदेगा।

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