2019 आम चुनाव की दस्तक हो चुकी हैं। हाल ही में हुए पाँच राज्यों का चुनाव लोकसभा चुनाव का सेमिफाइनल माना जा कहा था। जिसे काग्रेंस ने पास किया तो वही क्षेत्रिय दलों का दबदबा भी ऊपर उठा हैं। 3 राज्यों में काग्रेंस की सरकार बनने और तेलंगाना में टीआरएस की सरकार बनने के बाद अब तीसरे मोर्चे की कवायद तेज हो चली हैं। तीसरे मोर्चे बनाने की अगुवाई तेलंगाना के सीएम केसीआर ने सम्भाली हैं। इसके लिए वो पिछले दिनों ओडिशा और पश्चिम बंगाल की सीएम से भी मिले हैं।बता दे , केसीआर को ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहाद उल मुस्लिम के अध्यक्ष बैरिस्टर असद ओवैसी के करीबीयो में से गिना जाता हैं। केसआर अपने बयानों के कई बार ओवैसी को दोस्त भी बता चुके हैं। ओवैसी के दोस्त यानी केसीआर जिस तरह से तीसरे मोर्चे बनाने के लिए एक के बाद एक बैठकों का दौर जारी है उससे काग्रेंस और बीजेपी में खलबली मच गई हैं। काग्रेंस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि केसीआर बीजेपी की मदद कर रहे है जबकि बीजेपी ने इस विपक्षी एकता को फर्जी बताया हैं।आगामी 2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राव ने गैर-काग्रेंसी और गैर-बीजेपी दलों को साथ लाने की कवायद तेज कर दी हैं। केसीआर ने इसी सिलसिले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनर्जी से मुलाकात की। इससे पहले केसीआर ओडीशा के मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं। केसीआर ने मिडिया से कहा कि ‘हमारी सभी दलों से बातचीत जारी रहेगी , हम एक मजबूत योजना और नए फ्रंट के साथ जल्द ही सामने आएगे। हम सभी चीजों को लेकर बातचीत कर रहे हैं।
केसीआर ने ममता से मुलाकात को राष्ट्रीय हित और राजनैतिक हित बताया। उन्होनें ये भी कहा कि जब दो राजनेता मिलते है तो यही बातचीत अक्सर होती हैं। उन्होनें ये भी कहा कि ममता और हमारी वार्ता काफी पॉजीटीव रही। इसी तरह ओर भी दलों से बातचीत जारी रखेगें। गौरतलब है कि केसीआर कल ओडिशा के मुख्यमंत्री से गठबंधन को लेकर बातचीत की। केसीआर ने नवीन पटनायक ने मुलाकात करने के बाद कहा था कि ‘देश में इस समय क्षेत्रिय दलों को इकट्ठा होने की जरुरत है।

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